बेटियां अंधेरा दूर करती हैं
सुनीता काम्बोज
यही बेरंग जीवन में हमेशा रंग भरती हैं
सदा ही बेटियां घर के अंधेरे दूर करती हैं
है इनकी वीरता को ये जमाना जानता सारा
ये शीतल सी नदी भी हैं, ये बन जाती हैं अंगारा
ये तूफानों से लड़ती हैं नहीं लहरों डरती हैं
दा ही बेटियां घर के अंधेरे दूर करती हैं
हमेशा खून से ये सींचती सारी ही फुलवारी
छुपा लेती हैं ये मन में ही अपनी वेदना सारी
mgid
ये सौ-सौ बार जीती हैं ये सौ-सौ बार मरती हैं
सदा ही बेटियां घर के अंधेरे दूर करती हैं
aniview
हवाएं राह में इनके सदा कांटे बिछाती हैं
मगर जो ठान लेती ये वही करके दिखातीं हैं
ये मोती खोज लाती हैं जो सागर में उतरती हैं
सदा ही बेटियां घर के अंधेरे दूर करती हैं