यह सर्दी बरपा रही है कैसा कहर। आलम को गिरफ्त में लिए है शीतलहर। ठिठुरन के आगोश में हर बस्ती, गांव, शहर। पारा और भी गिर-गिर जाता है शामो-सहर।।1।। सूरज भी लुका-लुका है भरी दोपहर। कम पड़ने लगे हैं सभी शालो-स्वेटर।। पक्षी, पेड़, जीव सब सहमे-सहमे, घनी बर्फबारियां...