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Last Updated : शनिवार, 18 अप्रैल 2026 (14:42 IST)

भैरवी डाक के बाद 7 दिन छाएगा घना अंधकार? जानिए क्या है सच्चाई और किन बातों का रखें ध्यान

In the image, on one side is Mother Bhairavi, and on the other, a great war.
What is Bhairavi Dak: ओड़िशा की "भैरवी डाक" (या भैरवी डांक) का संबंध मुख्य रूप से ओड़िशा की 'मालिका' परंपरा और भविष्यवाणियों से है। ओड़िशा के प्रसिद्ध संत अच्युतानंद दास द्वारा लिखित 'मालिका' (भविष्यवाणी की पुस्तकें) में "भैरवी डाक" का उल्लेख मिलता है। इसका अर्थ है "देवी भैरवी की पुकार" या गर्जना। मान्यताओं के अनुसार, जब कलियुग का अंत निकट होगा, तब देवी भैरवी की भयानक गर्जना सुनाई देगी और फिर विनाश प्रारंभ होगा।

1. महाविनाश का संकेत

  1. धार्मिक मान्यताओं और मालिका के जानकारों के अनुसार, यह "डाक" या आवाज 3 बार सुनाई देगी।
  2. कहते हैं कि यह डाक मीन शनि योग में सुनाई देगी, वर्तमान में मीन शनि योग ही चल रहा है। हर 30 वर्ष में यह योग आता है।
  3. मान्यता अनुसार पहली गर्जन इस बात का संकेत रहेगा कि माता का ध्यान भंग हो गया, दूसरी में माता अपना स्थान छोड़ देगी और तीसरी में वह रक्तपान करेगी।
  4. यह आवाज विशेष रूप से ओड़िशा के कुछ क्षेत्रों (जैसे पुरी या भुवनेश्वर) में सुनाई देने की बात कही जाती है।
  5. मान्यता है कि जब यह ध्वनि गूंजेगी, तो इसके प्रभाव से कान बहरे हो सकते हैं, लोग बेहोश हो सकते हैं और कुछ की जान भी जा सकती है।

2. महाविनाश की शुरुआत

  • इसे आने वाले प्राकृतिक संकटों, युद्धों या युग परिवर्तन (कलियुग के अंत और सत्ययुग के आगमन) का संकेत माना जाता है।
  • ऐसी भी मान्यता है कि भैरवी डाक के बाद कुछ ऐसा होगा जिससे कि धरती पर 7 दिनों के लिए अंधेरा छा जाएगा, सूर्य नजर नहीं आएगा। लोग अज्ञात कारणों से मरने लगेंगे।
  • ओडिशा के लोगों के बीच यह मान्यता है कि इस डाक के बाद महाविनाश प्रारंभ होगा। तब लोगों को सतर्क होकर 1 वर्ष का राशनभरक अपने अपने घरों में छुपना होगा। जैसा कि कोरोना काल में हुआ था।

3. आध्यात्मिक महत्व

"भैरवी डाक" को माँ शक्ति की एक चेतावनी के रूप में देखा जाता है। ओड़िशा में माता विमला सहित माँ भैरवी के कई प्राचीन पीठ हैं (जैसे गंजम जिले में सिद्ध भैरवी), जहाँ तांत्रिक और शाक्त परंपराएँ बहुत गहरी हैं। लोक कथाओं में कहा जाता है कि जब अधर्म चरम पर होगा, तब माँ भैरवी अपनी "डाक" (पुकार) से कल्कि अवतार के आगमन का मार्ग प्रशस्त करेंगी और दुष्टों का रक्तपान करेंगी।
 
 
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें