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बजट पेश करने से पहले सीतारमण ने क्यों की इस अधिकारी की तारीफ?
बजट पेश करने से पहले निर्मला सीतारमण का अपने एक अधिकारी की तारीफ करना चर्चा का विषय रहा। दरअसल, वित्त मंत्रालय के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से अधिकारी की तारीफ की गई है।
जिस अधिकारी की मंत्रालय के ट्विटर हैंडल से तारीफ की गई वो वित्त मंत्रालय की प्रेस में उप- प्रबंधक हैं। दरअसल 26 जनवरी को कुलदीप शर्मा के पिता का निधन हो गया था। लेकिन वो बजट पेपर छपने और पेश होने तक घर नहीं जा सकते थे। लिहाजा वो अपने पिता के निधन के वक्त घर नहीं जा पाए।
इसी बात को लेकर वित्त मंत्रालय के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से कुलदीप शर्मा की तारीफ में दो ट्वीट किए।
ट्वीट में वित्त मंत्रालय की तरफ से लिखा गया,
'हमें यह बताते हुए बेहद अफसोस हो रहा है कि श्री कुलदीप कुमार शर्मा, उप प्रबंधक (प्रेस) ने 26 जनवरी 2020 को अपने पिता को खो दिया। बजट ड्यूटी पर होते हुए वह बाहर नहीं जा सकते थे। अपने पिता को खोने के बावजूद शर्मा ने एक मिनट के लिए भी प्रेस एरिया को नहीं छोड़ने का फैसला लिया'
मंत्रालय ने आगे कहा,
'श्री शर्मा के पास बजट प्रक्रिया में 31 साल का अनुभव है। इसी कारण बेहद कम समय में बजट दस्तावेज के छपाई कार्य को पूरा करने में उनकी अहम भूमिका थी। अनुकरणीय प्रतिबद्धता का प्रदर्शित करते हुए शर्मा ने व्यक्तिगत नुकसान की अनदेखी करते हुए अपने कर्तव्य के प्रति असाधारण ईमानदारी दिखाई'
क्या है नियम, क्यों नहीं जा सकें बाहर
दरअसल, बजट दस्तावेज छपने की प्रक्रिया हलवा सेरेमनी से शुरू हो जाती है। इस साल यह 20 जनवरी को शुरू हुई थी। इस दौरान जो भी अधिकारी बजट प्रक्रिया में शामिल है वो वित्त मंत्रालय में ही रहता है। कुलदीप शर्मा वित्त मंत्रालय में प्रेस उप प्रबंधक हैं, लिहाजा वे भी बाहर नहीं जा सकते थे।
नियमों के मुताबिक बजट पर काम करने वाला लगभग 100 लोगों का स्टाफ 2 से 3 हफ्तों तक दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक ऑफिस में ही रहता है। उन्हें बिल्कुल भी बाहर जाने की इजाजत नहीं होती है। नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट स्थित प्रिंटिंग प्रेस में बजट से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी को लगभग ‘लॉक’ कर दिए जाता हैं। इस दौरान उन्हें अपने परिजनों तक से बातचीत करने अथवा मिलने की अनुमति नहीं होती है।
जिस अधिकारी की मंत्रालय के ट्विटर हैंडल से तारीफ की गई वो वित्त मंत्रालय की प्रेस में उप- प्रबंधक हैं। दरअसल 26 जनवरी को कुलदीप शर्मा के पिता का निधन हो गया था। लेकिन वो बजट पेपर छपने और पेश होने तक घर नहीं जा सकते थे। लिहाजा वो अपने पिता के निधन के वक्त घर नहीं जा पाए।
इसी बात को लेकर वित्त मंत्रालय के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से कुलदीप शर्मा की तारीफ में दो ट्वीट किए।
ट्वीट में वित्त मंत्रालय की तरफ से लिखा गया,
मंत्रालय ने आगे कहा,
'श्री शर्मा के पास बजट प्रक्रिया में 31 साल का अनुभव है। इसी कारण बेहद कम समय में बजट दस्तावेज के छपाई कार्य को पूरा करने में उनकी अहम भूमिका थी। अनुकरणीय प्रतिबद्धता का प्रदर्शित करते हुए शर्मा ने व्यक्तिगत नुकसान की अनदेखी करते हुए अपने कर्तव्य के प्रति असाधारण ईमानदारी दिखाई'
क्या है नियम, क्यों नहीं जा सकें बाहर
दरअसल, बजट दस्तावेज छपने की प्रक्रिया हलवा सेरेमनी से शुरू हो जाती है। इस साल यह 20 जनवरी को शुरू हुई थी। इस दौरान जो भी अधिकारी बजट प्रक्रिया में शामिल है वो वित्त मंत्रालय में ही रहता है। कुलदीप शर्मा वित्त मंत्रालय में प्रेस उप प्रबंधक हैं, लिहाजा वे भी बाहर नहीं जा सकते थे।
नियमों के मुताबिक बजट पर काम करने वाला लगभग 100 लोगों का स्टाफ 2 से 3 हफ्तों तक दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक ऑफिस में ही रहता है। उन्हें बिल्कुल भी बाहर जाने की इजाजत नहीं होती है। नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट स्थित प्रिंटिंग प्रेस में बजट से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी को लगभग ‘लॉक’ कर दिए जाता हैं। इस दौरान उन्हें अपने परिजनों तक से बातचीत करने अथवा मिलने की अनुमति नहीं होती है।
