वक्फ संशोधन बिल से क्यों नाराज है मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड?
वक्फ संशोधन विधेयक पर AIMPLB के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि यह विधेयक भेदभावपूर्ण और सांप्रदायिकता से प्रेरित है। दुख की बात है कि जेपीसी में जो विपक्ष के सदस्य थे उनकी बात को भी माना नहीं गया। अगर यह विधेयक संसद में पारित हो जाता है, तो हम इसके खिलाफ़ देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। हम चुप नहीं बैठेंगे। हम अपने पास उपलब्ध सभी कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों का उपयोग करेंगे। जब तक प्रस्तावित संशोधन वापस नहीं लिए जाते, हम शांतिपूर्ण आंदोलन चलाएंगे।
एआईएमपीएलबी के वरिष्ठ कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा एआईएमपीएलबी और अन्य मुस्लिम संगठनों ने विधेयक पर अपनी चिंताओं से संयुक्त संसदीय समिति को अवगत कराया था, लेकिन इस पर विचार नहीं किया गया। इसके बाद, दिल्ली और पटना समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किए गए जहां प्रदर्शनकारियों ने असहमति दर्ज कराने के लिए सांकेतिक रूप से काली पट्टी बांधी।
इस बीच, वाराणसी में विभिन्न अदालती मामलों में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि विधेयक ने वक्फ बोर्डों के पहले के कई अधिकारों को कम कर दिया है, जो एक सकारात्मक कदम है। यह विधेयक वक्फ की परिभाषा में महत्वपूर्ण बदलाव करता है और इसकी अनियंत्रित शक्तियों को सीमित करता है। यह एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन कुछ पहलुओं पर अभी भी ध्यान देने और बहस की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक के माध्यम से हमें बहुत राहत मिली है। लेकिन अभी भी बहुत कुछ बाकी है। गलत तरीके से जिन संपत्तियों को वक्फ संपत्ति नामित किया गया उन्हें वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। उदाहरण के लिए, किसी अन्य धर्म या न्यास की संपत्ति जो सरकारी संपत्ति नहीं है और जिसे वक्फ संपत्ति घोषित किया गया है, उसे वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने उपरोक्त मुद्दों पर कोई प्रावधान नहीं किए जाने के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार द्वारा दिन में संसद में वक्फ विधेयक पेश किया जाना है। विपक्षी दल इस विधेयक का कड़ा विरोध कर रहे हैं और इसे असंवैधानिक तथा मुस्लिम समुदाय के हितों के विरुद्ध बता रहे हैं।
edited by : Nrapendra Gupta