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मल्टी-सिस्टम इन्फ्लैमेटरी सिंड्रोम (MIS-C) नई चिंता, कैसे निपटें...
कोरोना वायरस की रफ्तार कम होने लगी है लेकिन अन्य गंभीर बीमारियां बड़ों से लेकर बच्चों में पाई जा रही है। बड़ों में अलग किस्म की जीवनघातक बीमारियां हो रही है तो दूसरी ओर बच्चों में कोविड के बाद मल्टी-सिस्टम इन्फ्लैमेटरी सिंड्रोम (एमआईएस-सी) बीमारी पाई जा रही है। पिछले साल 2020 के मुकाबले इस साल 2021 में बच्चों में कोविड-19 और एमआईएस-सी के केस लगातार सामने आ रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है मल्टी-सिस्टम इन्फ्लैमेटरी सिंड्रोम, लक्षण और उपाय।
मल्टी-स्टिस्टम इन्फ्लैमेटरी सिंड्रोम क्या है?
यह बीमारी कोविड-19 से ठीक होने के बाद बच्चों में पाई जा रही है या परिवार में कोई संक्रमित हो गया था उनसे भी दूरी बनाकर एहतियात बरतने के लिए कहा जा रहा है। कोविड -19 से संक्रमित बच्चों के ठीक होने के बाद परिजन को कम से कम 6 से 8 सप्ताह तक बच्चों की अच्छे से देखभाल करना है। क्योंकि यह बीमारी कोविड-19 से ठीक होने के बाद जन्म ले रही है।
यह बीमारी कोविड-19 से ठीक होने के बाद बच्चों में पाई जा रही है या परिवार में कोई संक्रमित हो गया था उनसे भी दूरी बनाकर एहतियात बरतने के लिए कहा जा रहा है। कोविड -19 से संक्रमित बच्चों के ठीक होने के बाद परिजन को कम से कम 6 से 8 सप्ताह तक बच्चों की अच्छे से देखभाल करना है। क्योंकि यह बीमारी कोविड-19 से ठीक होने के बाद जन्म ले रही है।
कोविड-19 से ठीक होने के बाद जब रक्षा प्रणाली शरीर में अति सक्रिय हो जाती है। जिससे पाचन तंत्र, ह्दय, फेफड़ें, ब्लड वेसल, दिमाग जैसे अंगों पर इसका प्रभाव पड़ता है और यह सूजने लग जाती है।
इस बीमारी के अमेरिका और यूके में अधिक केस सामने आ रहे थे। लेकिन अब भारत में भी इसका प्रभाव बढ़ता दिख रहा है।
मल्टी-स्टिस्टम इन्फ्लैमेटरी सिंड्रोम के लक्षण
- तेज बुखार, पेट दर्द, हार्ट, फेफड़ों में समस्या होना, मस्तिष्क प्रभावित होना। इसी के साथ शरीर पर लाल चकत्ते होना, आंखें लाल होना, जीभ लाल पड़ना। यह बीमारी एकदम पकड़ में नहीं आती है।
- तेज बुखार, पेट दर्द, हार्ट, फेफड़ों में समस्या होना, मस्तिष्क प्रभावित होना। इसी के साथ शरीर पर लाल चकत्ते होना, आंखें लाल होना, जीभ लाल पड़ना। यह बीमारी एकदम पकड़ में नहीं आती है।
मल्टी-स्टिस्टम इन्फ्लैमेटरी सिंड्रोम से बचाव के उपाय
यूरोप के नेशनल हेल्थ मिशन के मुताबिक इस बीमारी के बताए गए लक्षण दिखने पर तुरंत हाॅस्पिटल ले जाना चाहिए। इस बीमारी से ठीक होने के लिए इंट्रावीनस इम्यूनोग्लोबुलिन एंटीबाॅडी और एस्पिरिन दो तरह की दवा दी जाती है। डाॅक्टर लक्षण के मुताबिक काॅर्टिकोस्टेराॅयड्स भी देते हैं। लेकिन सभी अलग - अलग लक्षण के अनुसार दी जाती है।
यूरोप के नेशनल हेल्थ मिशन के मुताबिक इस बीमारी के बताए गए लक्षण दिखने पर तुरंत हाॅस्पिटल ले जाना चाहिए। इस बीमारी से ठीक होने के लिए इंट्रावीनस इम्यूनोग्लोबुलिन एंटीबाॅडी और एस्पिरिन दो तरह की दवा दी जाती है। डाॅक्टर लक्षण के मुताबिक काॅर्टिकोस्टेराॅयड्स भी देते हैं। लेकिन सभी अलग - अलग लक्षण के अनुसार दी जाती है।
