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इन 10 खास बातों से जानिए हरियाली तीज का महत्व
Hariyali Teej 2020
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज का त्योहार महिलाओं में उत्साह और उमंग से भर देता है। भगवान शंकर और माता पार्वती को समर्पित हरियाली तीज की तैयारियां महिलाएं एक महीने पहले से ही प्रारंभ कर देती हैं। इस बार यह पर्व 23 जुलाई 2020, गुरुवार को मनाया जा रहा है। आइए जानें इस पर्व की 10 खास बातें...
1. इस दिन सुहागिन मेंहदी लगाकर झूलों पर सावन का आनंद मनाती हैं, प्रकृति धरती पर चारों ओर हरियाली की चादर बिछा देती है और मन मयूर हो उठता है।
2. हाथों पर हरी मेंहदी लगाना प्रकृति से जुड़ने की अनुभूति है जो सुख-समद्धि का प्रतीक है। इसके बाद वही मेंहदी लाल हो उठती है जो सुहाग, हर्षोल्लास एवं सौंदर्य का प्रतिनिधित्व करती है।
3. जिस लड़की के ब्याह के बाद पहला सावन आता है, उसे ससुराल में नहीं रखा जाता। इसका कारण यह भी था कि नवविवाहिता अपने मां बाप से ससुराल में आ रही कठिनाइयों, खटटे् मीठे अनुभवों को सखी सहेलियों के साथ बांट सके और मन हल्का करने के अलावा कठिनाईयों का समाधान भी खोजा जा सके।
4. नवविवाहित पुत्री की ससुराल से सिंगारा आता है और ऐसी ही सामग्री का आदान प्रदान किया जाता है ताकि संबंध और मधुर हों और रिश्तेदारी प्रगाढ़ हो।
5. इसमें उसके लिए साड़ियां, सौंदर्य प्रसाधन, सुहाग की चूड़ियां व संबंधित सामान के अलावा उसके भाई बहनों के लिए आयु के अनुसार कपड़े, मिष्ठान तथा उसकी आवश्यकतानुसार गिफ्ट भेजे जाते हैं।
6. तीज से एक दिन पहले मेंहदी लगा ली जाती है। तीज के दिन सुबह स्नानादि श्रृंगार करके, नए वस्त्र व आभूषण धारण करके गौरी की पूजा होती है।
7. इसके लिए मिट्टी या अन्य धातु से बनी शिवजी-पार्वती व गणेश जी की, मूर्ति रख कर उन्हें वस्त्रादि पहना कर रोली, सिंदूर, अक्षत आदि से पूजन किया जाता है।
8. इसके बाद 8 पूरी, 6 पूओं से भोग लगाया जाता है। फिर यह बायना जिसमें चूड़ियां, श्रृंगार का सामान व साड़ी, मिठाई, दक्षिणा या शगुन राशि इत्यादि अपनी सास, जेठानी, या ननद को देते हुए चरण स्पर्श करती हैं।
9. इसके बाद पारिवारिक भोजन किया जाता है। सामूहिक रुप से झूला झूलना, तीज मिलन, गीत संगीत, जलपान आदि किया जाता है। कुल मिला कर यह पारिवारिक मिलन का सुअवसर होता है, तीज पर इन तीन चीजों का त्याग करने का भी विधान है।
1. पति से छल कपट,
2 .झूठ और दुर्व्यवहार
3. परनिंदा।
10. तीज पर ही माता गौरा विरह में तपकर शिव से मिली थी। ये तीन सूत्र सुखी पारिवारिक जीवन के आधार स्तंभ हैं, जो वर्तमान आधुनिक समय में और भी प्रासंगिक हो जाते हैं।
